राजस्थान मुख्यमंत्री राजश्री योजना 2026: राजस्थान सरकार द्वारा संचालित मुख्यमंत्री राजश्री योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में बेटियों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना है, ताकि उनके स्वास्थ्य और शैक्षणिक स्तर में सुधार लाया जा सके।
इस योजना के अंतर्गत 1 जून 2016 या उसके बाद जन्मी सभी बालिकाएं लाभ पाने की हकदार हैं। सरकार द्वारा बालिकाओं के जन्म से लेकर 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई और उनके पालन-पोषण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
राजस्थान मुख्यमंत्री राजश्री योजना 2026
इस योजना का उद्देश्य समाज में व्याप्त लिंग भेदभाव को मिटाना, बालिकाओं की शिक्षा सुनिश्चित करना और शिशु मृत्यु दर में कमी लाना है।
राज्य सरकार बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने हेतु आर्थिक सहायता प्रदान करती है, जिससे राज्य में साक्षरता दर में सुधार हो सके।
यह पहल केंद्र सरकार के 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान को मजबूती प्रदान करने का एक प्रयास है।
मुख्यमंत्री राजश्री योजना वित्तीय सहायता
योजना के तहत बालिका के जन्म से लेकर 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई के लिए कुल 50,000 रुपये तक की आर्थिक मदद दी जाती है, जो इन चरणों में मिलती है:
- जन्म के समय - 2,500 रुपये
- एक वर्ष का टीकाकरण पूरा होने पर - 2,500 रुपये
- पहली कक्षा में प्रवेश पर - 4,000 रुपये
- छठी कक्षा में प्रवेश पर - 5,000 रुपये
- दसवीं कक्षा में प्रवेश पर - 11,000 रुपये
- बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण करने पर - 25,000 रुपये
राजश्री योजना: पात्रता और मानदंड
- बालिका का जन्म 1 जून 2016 या उसके बाद हुआ हो।
- माता-पिता के पास आधार कार्ड या जन आधार/भामाशाह कार्ड होना अनिवार्य है।
- केवल राजस्थान के मूल निवासी ही इस योजना के लिए पात्र हैं।
- पहली दो किश्तें उन बालिकाओं को मिलती हैं जिनका जन्म सरकारी या अधिकृत निजी अस्पतालों में हुआ है।
- सरकारी शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाली बालिकाएं ही इन किश्तों के लिए पात्र हैं।
- दूसरी किश्त मातृ-शिशु स्वास्थ्य कार्ड/ममता कार्ड के आधार पर टीकाकरण पूरा होने के बाद दी जाती है।
- लाभ सीधे बैंक खाते में भेजने के लिए जन आधार कार्ड का लिंक होना जरूरी है।
- जन आधार/भामाशाह कार्ड की अनिवार्यता:
- योजना का लाभ लेने के लिए कार्ड अनिवार्य है।
- भुगतान सीधे बैंक खाते में पाने के लिए विवरण अपडेट रखें।
- जिनका नामांकन नहीं हुआ है, वे ई-मित्र केंद्र के माध्यम से इसे बनवाकर आंगनबाड़ी या अस्पताल में जमा करें।